शायरी के दर्द से सृजन की ओर: मनीषा अंजलि के साथ काव्य लेखन की ऑनलाइन कार्यशाला

अदब की दुनिया में टूटे हुए दिल की आवाज़ जब शायरी में ढलती है, तो वह केवल शब्दों का खेल नहीं रह जाती, बल्कि रूह का सुकून बन जाती है। बशीर बद्र का यह कहना कि ‘तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊँगा’, महज एक पंक्ति नहीं, बल्कि उस बेबसी का इकरार है जो इश्क में नाकाम होने पर महसूस होती है। इसी तरह जब जिगर मुरादाबादी कहते हैं कि ‘हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका’, तो यह उस टीस को बयां करता है जो एकतरफा मोहब्बत या रिश्तों की उलझन से पैदा होती है। मुनव्वर राना का जुदाई के सफर को आसान करने की गुहार लगाना या फिर गुलाम मोहम्मद कासिर का यह स्वीकारना कि ‘मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता’, यह सब दर्शाता है कि शायरी असल में जिंदगी की कड़वी सच्चाइयों का आईना है। जावेद सबा की ‘तन्हाई की आदत’ और अख्तर सईद खान की ‘नसीब’ की बातें पाठकों को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या महज जज्बात होना काफी है, या इन भावनाओं को कागज पर उतारने के लिए किसी हुनर की भी जरूरत होती है? इसी हुनर को तराशने के लिए एक खास मौके का एलान किया गया है।

ऑनलाइन फीडबैक और कवि के तौर पर विकास

उन तमाम उभरते हुए कलमकारों के लिए जो अपनी भावनाओं को बशीर बद्र या मुनव्वर राना जैसी गहराई देना चाहते हैं, ‘राइटर्स विक्टोरिया’ ने ‘पोएट्री विद मनीषा अंजलि’ नाम से एक विशेष ऑनलाइन फीडबैक सत्र की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम पांच महीने तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य कवियों को उनकी रचनाओं पर व्यक्तिगत राय और मार्गदर्शन प्रदान करना है। इस कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को 60 पंक्तियों तक की अपनी कविता जमा करने का मौका मिलेगा। इस प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि आपको न केवल प्रशिक्षक मनीषा अंजलि से, बल्कि अपने साथी कवियों से भी रचनात्मक आलोचना मिलेगी। यह फीडबैक आपकी अधूरी या निर्माणाधीन कविताओं को विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

सीखने की प्रक्रिया और तकनीकी ढांचा

यह पूरी कार्यशाला एक निजी वर्डप्रेस सर्वर पर आयोजित की जाएगी, जहाँ फीडबैक राउंड्स के लिए विशेष फोरम बनाए गए हैं। आधुनिक जीवनशैली की व्यस्तताओं को ध्यान में रखते हुए, इन ऑनलाइन क्लिनिक को पूरी तरह से ‘एसिंक्रोनस’ रखा गया है। इसका मतलब है कि इसमें कोई आमने-सामने की बैठक या फिक्स टाइमिंग वाली जूम कॉल नहीं होगी। प्रतिभागी अपनी सुविधानुसार दिन या सप्ताह के किसी भी समय लॉग इन कर सकते हैं और कंटेंट के साथ जुड़ सकते हैं। सबमिशन राउंड के बीच में, मनीषा अंजलि प्रतिभागियों के अभ्यास को दिशा देने के लिए ज्ञानवर्धक पठन सामग्री और टिप्पणियां साझा करेंगी। यह सिर्फ लिखने के बारे में नहीं है, बल्कि नियमित लेखन के जरिए अनुशासन बनाने, शिल्प को निखारने और साथियों की समीक्षा के माध्यम से आलोचनात्मक पठन कौशल विकसित करने का एक समग्र प्रयास है।

मार्गदर्शक की प्रोफाइल और प्रकाशन का अवसर

इस कार्यशाला का नेतृत्व प्रसिद्ध लेखिका मनीषा अंजलि कर रही हैं, जो ‘नाग माउंटेन’ (गिरामांडो, 2024) की लेखिका हैं। साहित्य जगत में उनकी पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी कृति जूडिथ राइट कैलेंथे अवार्ड के लिए शॉर्टलिस्ट हुई थी और प्रतिष्ठित स्टेला प्राइज की लंबी सूची में भी शामिल रही है। इसके अलावा, उन्हें विक्टोरियन प्रीमियर लिटरेरी अवार्ड्स में भी सराहा गया है। फिजी, एओटेरोआ और ऑस्ट्रेलिया में रहने का उनका अनुभव उनकी शिक्षण शैली में विविधता लाता है। जो प्रतिभागी इस कार्यशाला के पांचों राउंड में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, उनके लिए एक सुनहरा अवसर भी है। उन्हें अपने काम को ‘राइटर्स विक्टोरिया’ के ऑनलाइन एंथोलॉजी (काव्य संग्रह) में शामिल करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन मंच है जो अपनी तन्हाई और जज्बातों को, जैसा कि जावेद सबा ने अपनी शायरी में कहा है, दुनिया के सामने एक कलात्मक रूप में पेश करना चाहते हैं।